Please Celebrate Valentine day.

7 Feb

भारतीय भाइयों और बहनों !

 

सोचो, क्या हम पाश्चात्य गन्दगी को अपने देश मे आने दें? क्या भारत के माता-पिता ये चाहेंगे कि उनकी बेटियाँ पाश्चात्य अन्धानुकरण से प्रभावित होकर , वेलेन्टाईन डे मनाकर, भोग-वासना के शिकार बनकर गर्भपात करें या नाबालिग माँ बनकर देश,  समाज और परिवार पर बोझा बनें । यह हमारी सनातन संस्कृति और संयमी जीवन का  ही फल है, जिससे भारत पूरे विश्व में अपना वर्चस्व कायम करने में सफल रहा है | युवावस्था में ब्रह्मचर्य ही सफल जीवन की नींव है |

प्रेम-दिवस (वेलेन्टाईन डे) के नाम पर विनाशकारी काम-विकार का विकास हो रहा है, जो आगे चलकर चिड़चिड़ापन, तनाव, खोखलापन, जल्दी बुढ़ापा और मौत लानेवाला दिवस साबित होगा । अतः भारतवासी इस अंधपरम्परा से सावधान हों !
‘इन्नोसन्टी रिपोर्ट कार्ड’ के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं । उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं और 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अमेरिका में हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं ।
यौन-संबंध करनेवालों में 25% किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों से पीड़ित हैं । असुरक्षित यौन-संबंध करनेवालों में 50% को गोनोरिया, 33% को जैनिटल हर्पिस और एक प्रतिशत को एड्स का रोग होने की सम्भावना है। एड्स के नये रोगियों में 25% रोगी 22 वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं । आज अमेरिका के 33% स्कूलों में यौन-शिक्षा के अंतर्गत ‘केवल संयम’ की शिक्षा दी जाती है । इसके लिए अमेरिका ने 40 करोड़ से अधिक डॉलर (20 अरब रुपये) खर्च किये हैं ।
प्रेम-दिवस जरूर मनायें लेकिन प्रेम-दिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए । युवक-युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा । इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । संतानें अपने माता-पिता के गले लगें । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें ।
तुम भारत के लाल और भारत की लालियाँ (बेटियाँ) हो । प्रेम-दिवस मनाओ, अपने माता-पिता का सम्मान करो और माता-पिता बच्चों को स्नेह करें । करोगे न बेटे ऐसा ! पाश्चात्य लोग विनाश की ओर जा रहे हैं । वे लोग ऐसे दिवस मनाकर यौन रोगों का घर बन रहे हैं, अशांति की आग में तप रहे हैं । उनकी नकल तो नहीं करोगे !
मेरे प्यारे युवक-युवतियो और उनके माता-पिता ! आप भारतवासी हैं। दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों की संतान हैं । ‘वेलेन्टाईन डे’ के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश हो, ऐसे दिवस का त्याग करके प्रभु के नाते एक-दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें । काम-विकार नहीं, रामरस, प्रभुप्रेम, प्रभुरस…
मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । बालिकादेवो भव ।
कन्यादेवो भव । पुत्रदेवो भव ।
* माता-पिता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा ।
पाश्चात्यों का अनुकरण आप क्यों करो ! आपका अनुकरण करके वे सद्भागी हो जायें ।
जो राष्ट्रभक्त नागरिक यह राष्ट्रहित का कार्य करके भावी सुदृढ़ राष्ट्र-निर्माण में साझेदार हो रहे हैं, वे धनभागी हैं और जो होनेवाले हैं उनका भी आवाहन किया जाता है।
प्रेम-दिवस (वेलेन्टाईन डे) के नाम पर विनाशकारी काम-विकार का विकास हो रहा है, जो आगे चलकर चिड़चिड़ापन, तनाव, खोखलापन, जल्दी बुढ़ापा और मौत लानेवाला दिवस साबित होगा । अतः भारतवासी इस अंधपरम्परा से सावधान हों !
‘इन्नोसन्टी रिपोर्ट कार्ड’ के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं । उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं और 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अमेरिका में हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं ।
यौन-संबंध करनेवालों में 25% किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों से पीड़ित हैं । असुरक्षित यौन-संबंध करनेवालों में 50% को गोनोरिया, 33% को जैनिटल हर्पिस और एक प्रतिशत को एड्स का रोग होने की सम्भावना है। एड्स के नये रोगियों में 25% रोगी 22 वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं । आज अमेरिका के 33% स्कूलों में यौन-शिक्षा के अंतर्गत ‘केवल संयम’ की शिक्षा दी जाती है । इसके लिए अमेरिका ने 40 करोड़ से अधिक डॉलर (20 अरब रुपये) खर्च किये हैं ।
प्रेम-दिवस जरूर मनायें लेकिन प्रेम-दिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए । युवक-युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा । इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । संतानें अपने माता-पिता के गले लगें । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें ।
तुम भारत के लाल और भारत की लालियाँ (बेटियाँ) हो । प्रेम-दिवस मनाओ, अपने माता-पिता का सम्मान करो और माता-पिता बच्चों को स्नेह करें । करोगे न बेटे ऐसा ! पाश्चात्य लोग विनाश की ओर जा रहे हैं । वे लोग ऐसे दिवस मनाकर यौन रोगों का घर बन रहे हैं, अशांति की आग में तप रहे हैं । उनकी नकल तो नहीं करोगे !
मेरे प्यारे युवक-युवतियो और उनके माता-पिता ! आप भारतवासी हैं। दूरदृष्टि के धनी ऋषि-मुनियों की संतान हैं । ‘वेलेन्टाईन डे’ के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश हो, ऐसे दिवस का त्याग करके प्रभु के नाते एक-दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें । काम-विकार नहीं, रामरस, प्रभुप्रेम, प्रभुरस…
मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । बालिकादेवो भव ।
कन्यादेवो भव । पुत्रदेवो भव ।
* माता-पिता का पूजन करने से काम राम में बदलेगा, अहंकार प्रेम में बदलेगा, माता-पिता के आशीर्वाद से बच्चों का मंगल होगा ।
पाश्चात्यों का अनुकरण आप क्यों करो ! आपका अनुकरण करके वे सद्भागी हो जायें ।
जो राष्ट्रभक्त नागरिक यह राष्ट्रहित का कार्य करके भावी सुदृढ़ राष्ट्र-निर्माण में साझेदार हो रहे हैं, वे धनभागी हैं और जो होनेवाले हैं उनका भी आवाहन किया जाता है।

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One Response to “Please Celebrate Valentine day.”

  1. KUMAR 07/02/2011 at 8:01 PM #

    koshish karne waloki har nahi hoti

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