Message for YOUTH

13 Jan

वीरो ! अब तो जागो…..

5 हजार वर्ष से आलस्य एवं भोगरूपी निद्रा में सोये हुए भारत माता के होनहार युवको ! बहुत सो चुके हो, अब तो जागो। जरा देखो तो, तुम्हारे देश की कैसी अवस्था हो रही है ! अत्याचार, पाप, अनैतिकता और भ्रष्टाचार बढ़ रहे हैं। माताओं और बहनों का सतीत्व लूटा जा रहा है। देश में नैतिकता और आध्यात्मिकता का ह्रास होता जा रहा है। अन्यायी और अत्याचारी तुम्हें निगलने के लिए तैयार बैठे है। अब उठो, तुम्हारी भारत माता तुम्हारे सिरहाने के पास आकर तुम्हें जगा रही है।

‘खाओ, पियो और मौज करो’ यह तो आजकल के जवानों का नारा हो गया है। ऐ जवानो ! तुम क्या खा पी सकते हो ? तुमसे अधिक तो पशु खा पी सकते हैं। मनुष्य शरीर में क्या खा सकते हो ? कभी हाथी का शरीर मिलेगा तो कई मन खा जाओगे तो भी तुम्हें कोई पेटू नहीं कहेगा। मनुष्य योनि में आये हो तो कुछ ऐसा कर लो ताकि प्रशंसा का मुकुट बाँधकर मुस्कराते हुए प्रियतम परमात्मा से मिल सको।

इस शरीर से तुम कितने भोग भोगोगे ? तुमसे अधिक भोग भोगने की शक्ति तो बकरे, घोड़े और कुत्ते में है। विषयों के क्षणिक आनंद में मत बहो। सबसे अधिक आनंद तो स्वयं को पहचानने में है। यह मनुष्य जन्म तुम्हें बड़े भाग्य से मिला है। इसका सदुपयोग करके स्वयं को पहचान लो, नहीं तो सब कुछ व्यर्थ चला जायगा और चौरासी के चक्कर में भटकाकर रोते रहोगे।

उपनिषदों में लिखा है कि ‘संसार की कोई भी वस्तु आनंदमय नहीं है। शरीरसहित संसार के सारे पदार्थ क्षणिक अस्तित्व वाले हैं, किंतु आत्मा अजर-अमर है, परमानंदस्वरूप है।’

लँगड़ा कौआ मत बनो, शाहबाज बनो। केवल अपने लिए नहीं, सभी के लिये जियो। परोपकार उत्तम गुण है। संतों का धन क्या है ? परोपकार। बुरे व्यक्ति अच्छे कार्य में विघ्न डालते रहेंगे परंतु सत्यमेव जयते। यहाँ नहीं तो वहाँ देर-सवेर सत्य की ही जीत होती है। धर्म का अंग सत्य है। एक सत् को धारण करो तो समस्त दुष्ट स्वभाव नष्ट हो जायेंगे। विघ्नों को चूर्ण करो। हिम्मत रखो, दृढ़ निश्चय करो।

महान आत्मा बनो। ऐसा न सोचो कि ‘मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ?’ स्वामी विवेकानंद भी अकेले ही थे, फिर भी उन्होंने भारत को गुलाम बनाने वाले गोरों के देश में जाकर भारतीय संस्कृति की ध्वजा फहरायी थी। स्वामी रामतीर्थ भी तो अकेले ही थे। महात्मा गाँधी भी अकेले ही चले थे, परंतु उन्होंने दृढ़ निश्चय रखा तो हिन्दुस्तान का बच्चा-बच्चा उनके साथ हो गया। इन सभी का नाम अमर है। आज भी इनकी जयंतियाँ मनायी जाती हैं। एक आलू बोया जाय तो कालांतर में उससे सैंकड़ों मन आलू उत्पन्न हो सकते हैं। आम की एक गुठली बोने से हजारों आम पैदा किये जा सकते हैं।

स्वयं पर विश्वास रखो। शेर को यदि अपने-आप पर विश्वास न हो तो वह नींद कैसे ले सकता है ? वह तो वन के सभी प्राणियों का शत्रु है। हृदय में दिव्य गुणों को धारण करो तो तुम केवल अपने को ही नहीं अपितु दूसरों को भी तारोगे। जगत में यश-अपयश को सपना समझकर तुम अपने-आपको जानो।

अपने कर्त्तव्यपालन में अपने धर्म पर दृढ़ रहने के लिए चाहे जितने भी कष्ट आयें, उन्हें प्रसन्नता से रहना चाहिए। अंततः सत्य की ही जय होती है। तुम कहोगे कि कष्ट अच्छे नहीं होते परंतु मैं तुमसे कहता हूँ कि जिनमें कष्ट सहने की क्षमता नहीं है, वे दुनिया से निकल जायें। उन्हें संसार में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

हे आर्य वीरो ! अब जागो। आगे बढ़ो। हाथ में मशाल उठाकर अत्याचार से टक्कर लेने और महान बनने के लिए आगे बढ़ो। आगे बढ़ो और विजय प्राप्त करो। सच्चे कर्मवीर बाधाओं से नहीं घबराते। अज्ञान, आलस्य और दुर्बलता को छोड़ो।

जब तक पूरा न कार्य हो, उत्साह से करते रहो।

पीछे न हटिये एक तिल, आगे सदा बढ़ते रहो।।

नवयुवको ! पृथ्वी जल रही है। मानव-समाज में जीवन के आदर्शों का अवमूल्यन हो रहा है। अधर्म बढ़ रहा है, दीन-दुःखियों को सताया जा रहा है, सत्य को दबाया जा रहा है। यह सब कुछ हो रहा है फिर भी तुम सो रहे हो। उठकर खड़े हो जाओ। समाज की भलाई के लिए अपने हाथों में वेदरूपी अमृतकलश उठाकर लोगों की पीड़ाओं को शांत करो, अपने देश और संस्कृति की रक्षा के लिए अन्याय, अनाचार एवं शोषण को सहो मत। उनसे बुद्धिपूर्वक लोहा लो। सज्जन लोग संगठित हों। लगातार आगे बढ़ते रहो…. आगे बढ़ते रहो। विजय तुम्हारी ही होगी।

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2 Responses to “Message for YOUTH”

  1. Chandramauli Sinha 15/01/2011 at 11:01 AM #

    Sadho Sadho..!
    We, Indians shall awake and be a part of Our Guruji’s Pran.. And Sankalp that India would again retain as emerging Nation in its original culture and religion and become World Guru..!

    Gurudev ki sada jayjaykar ho…!

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  1. Message for YOUTH | Asaramji Bapu Satsang - ONE Blog to all Sadhak Blogs - 22/01/2011

    […] See original here: Message for YOUTH […]

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